ओ तपस्वी !!
सिन्धु से गम्भीर, हिमनग से अचल उज्ज्वल यशस्वी ।
ओ तपस्वी !!
साधना के दीप शुचिता के धरोहर
कर्म के संगीत शुचि मानस मनोहर
भावधन, विश्वास के विग्रह, जगत के ओ जयस्वी ।
ओ तपस्वी !!
राष्ट्र की प्रेरक कथा, कविता समय की
आर्ष-कुल कि सत्प्रथा शुचिता मलय की
ओ भगीरथ के अदम्य प्रयास जैसे ऊर्जस्वी ।
ओ तपस्वी !!
शक्ति की आराधना सेवा सनातन
भक्ति की उदभावना ममता चिरन्तन
मातृमन्दिर के अखण्डित दीप से ज्योतित जयस्वी ।
ओ तपस्वी !!
सहज-सेवा भावना निष्काम तन मन
पावनी भागीरथी सा दिव्य जीवन
दिव्य देवोपम हिमालय से परम पावन पयस्वी ।
ओ तपस्वी !!
प्रखर प्रतिभा के प्रकीर्ण प्रकाश अनुपम
सत्य की संकल्पना से मूर्त संयम
ओ यती सेवाव्रती, त्यागी, विरागी, ओ मनस्वी ।
ओ तपस्वी !!
.................................................. .................... ओमशंकर त्रिपाठी
सिन्धु से गम्भीर, हिमनग से अचल उज्ज्वल यशस्वी ।
ओ तपस्वी !!
साधना के दीप शुचिता के धरोहर
कर्म के संगीत शुचि मानस मनोहर
भावधन, विश्वास के विग्रह, जगत के ओ जयस्वी ।
ओ तपस्वी !!
राष्ट्र की प्रेरक कथा, कविता समय की
आर्ष-कुल कि सत्प्रथा शुचिता मलय की
ओ भगीरथ के अदम्य प्रयास जैसे ऊर्जस्वी ।
ओ तपस्वी !!
शक्ति की आराधना सेवा सनातन
भक्ति की उदभावना ममता चिरन्तन
मातृमन्दिर के अखण्डित दीप से ज्योतित जयस्वी ।
ओ तपस्वी !!
सहज-सेवा भावना निष्काम तन मन
पावनी भागीरथी सा दिव्य जीवन
दिव्य देवोपम हिमालय से परम पावन पयस्वी ।
ओ तपस्वी !!
प्रखर प्रतिभा के प्रकीर्ण प्रकाश अनुपम
सत्य की संकल्पना से मूर्त संयम
ओ यती सेवाव्रती, त्यागी, विरागी, ओ मनस्वी ।
ओ तपस्वी !!
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